चैत्रगौरी यह महाराष्ट्र में किया जानेवाला प्रसिद्ध व्रत है।
01 · What it is
Living Tradition
Documented cultural tradition on record; family classification awaits an editor.
02 · Where & name
Geography awaiting source
Add a cited source naming the region or community that carries it.
03 · How it is doing
□□□□ (Not yet assessed)
Documented in open cultural records, but no cited field assessment of its current vitality has been added here yet.
04 · Proof & reuse
2 cited sources
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Chapter Takeaways
स्वरूपचैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथीसे इस व्रत की शुरुआत होती है।
व्रत का स्वरूपझुलेमें बैठी देवी गौरी के पूजा हेतू कच्चे आमका शरबत और चनेकी दालसे बना हुआ भोग ख़ास तौरसे बनाया जाता है।
रंगोलीइस व्रतके अवसर पर महाराष्ट्र में नई नवेली दुल्हन पाँच साल तक अपने आंगनमें है विशिष्ट रंगोली बनाती है।
यह भी देखिएThe text above is adapted from the Wikipedia article “चैत्रगौरी”, available under the Creative Commons Attribution-ShareAlike 4.0 licence.
Common Questions Answered on Record
What is चैत्रगौरी in plain words?
The tradition & historical record
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चैत्रगौरी यह महाराष्ट्र में किया जानेवाला प्रसिद्ध व्रत है। महिला एवं युवती यह व्रत; त्योहार के स्वरूप में मनाती है। 1
स्वरूप
चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथीसे इस व्रत की शुरुआत होती है। वैशाख महिनेकीं तृतीय तिथी तक यह व्रत किया जाता है। इस व्रतका मुख्य उपचार है गौरी देवीको झुलेमें स्थापित करना और एक महीना उनकी पूजा करना। 1
व्रत का स्वरूप
झुलेमें बैठी देवी गौरी के पूजा हेतू कच्चे आमका शरबत और चनेकी दालसे बना हुआ भोग ख़ास तौरसे बनाया जाता है। वसंत ऋतुमें जो फल मिलते है वह देवीको भोगके स्वरूपमें चढ़ाए जाते है। विवाहित महिला को भोजनमें निमंत्रित किया जाता है। हल्दी, कुमकुम और चंदन लगाकर इस महिलाके देवीस्वरूप पूजा की जाती है। शामके समय पड़ोसी महिलाओंको निमन्त्रित किया जाता है और उन्हें हल्दी कुमकुम लगाकर कच्चे आमका शरबत दिया जाता है। भीगे हुए चने उन्हें भेट दिए जाते है। देवीका वर्णन करनेवाले भक्तिपूर्ण गीत गाएँ जाते है। 1
रंगोली
इस व्रतके अवसर पर महाराष्ट्र में नई नवेली दुल्हन पाँच साल तक अपने आंगनमें है विशिष्ट रंगोली बनाती है। उसे चैत्रागण नामसे संबोधित किया जाता है। इस रंगोलीमें भारतवर्ष के त्यौहार तथा भारतीय संस्कृतिके प्रतीक चित्रित किये जाट है। स्वस्तिक, ओमकार, तुलसी का पौधा, गाय के चरण चिह्न, गणेशजी, कृष्ण भगवान, चंद्र, सूर्य इनके चित्र इस रंगोलीमें बनाए जाते है। 1
The text above is adapted from the Wikipedia article “चैत्रगौरी”, available under the Creative Commons Attribution-ShareAlike 4.0 licence. 1
चैत्रगौरी is recorded in open cultural data. The structured record cited below does not describe the practice, and this entry has not yet been reviewed by a person familiar with the tradition. 2